मोदी जी सही कहा था, कॉंग्रेस को 60 वर्ष दिए, मुझे 60 दिन दो....और आपके शासन काल में अच्छा विकास हो रहा है......भारत के बैंकों से पूंजी विदेशी बैंकों में हस्तांतरित हो रही है....
आपने तो बोला था, कालाधन वापस आएगा...क्या हुआ!
एक मोदी ने गरीब के घर का पैसा बाहर निकाला, दूसरे मोदी ने पैसा विदेशी बैंकों में डाल दिया, इस पूरी प्रक्रिया में गांधी सरकार और देश का बैंकिंग सिस्टम अधिक जिम्मेदार!
देशकाल की परिस्थिति देखकर ऐसा लग रहा है कि नेताओं का एकमात्र काम है जनता को झूठे वादे करना और अपनी झोली भरना.....ये आज से नहीं बरसों से चला आ रहा है, सरकार कांग्रेस की हो या भाजपा की या अन्य कोई तीसरी पार्टी। चुनाव जीतना और घूसखोरी, भष्टाचार के सहारे भारी-भरकम पूंजी एकत्र कर विदेशी बैंकों में जमा करवाना।
गरीब ऊपर उठ नहीं सकता है; शिक्षा इतनी महंगी हो गई कि साधारण परिवार से आने वाले बच्चे अब शिक्षा पाने में असमर्थ हैं, तो उन्हें अच्छी नौकरी / सर्विस मिलना संभव नहीं है। किसी असाधारण को ही मुश्किल से कोई नौकरी मिल पाती है या अपने कैरियर में सफल हो पाता है।
क्या कर रही है सरकार..... क्या मोदी जी के मंत्र देने से बच्चे परीक्षा में सफल हो पाएंगे.... सरकार की लापरवाही है या सरकारी विभागों के ऑफिसर्स के द्वारा बनाई गई रणनीति..... प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर पहले से लीक किए जा रहे हैं, जिससे योग्य व काबिल उम्मीदवारों की मेहनत पर पानी फिर गया है। क्या कभी हो पाएगी पारदर्शिता...इतना अन्याय, व्याभिचार क्यों और कैसे इस देश में हर जगह, क्षेत्र में हो रहा है।
घोटाले होते हैं, मुल्जिम देश छोड़कर विदेश में शरण ले लेता है, जितनी माल-संपत्ति, पैसे की हेराफेरी हुई होती है, उसे गरीब जनता से वसूला जाता है। ये कहां की राजनीति है, क्यों न इसकी भरपाई देश के नेताओं के वेतन से वसूला जाता है। यहां पहुंह वाले घोटालेबाजों की पहचान सार्वजनिक नहीं हो पाती है और उन पर जांच चलती रहती है। चुनिंदा लोगों की संपत्ति जब्त की जाती है, जिस पर केस-मुकदमे जिंदगी भर चलते हैं और संपत्ति नष्ट हो जाती है।
कब आएंगे अच्छे दिन.....
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कैसे रहेगा आदमी स्वस्थ जब उसकी मेहनत की कमाई किसी अन्य के खाते में विदेशी बैंकों में जमा हो चुकी है
एक गरीब आदमी रात-दिन मेहनत कर पैसे कमाता है, परिवार का पालन-पोषण करने के लिए। और विपरीत स्थितियों में आवश्यक सामग्री तक पहुंच होने के लिए कुछ पैसा घर में ही छुपा कर रखता है और कुछ बैंक खाते में जमा करता है। और एक दिन अकस्मात देश के प्रधानमंत्री घोषणा करते हैं कि कल से बड़े मुद्रा नोट प्रचलन में नहीं होंगे और साथ ही देश के सार्वजनिक बैंक द्वारा जमा खाते के लिए एक निश्चित राशि निर्धारित कर दी जाती है। धनी लोगों पर इसका असर नहीं पड़ता है, लेकिन गरीब की कमर तोड़ दी जाती है। अब उसके पास विकल्प हैं – घर में रखे हुए कुछ पुराने नोट जमा करने बैंक पर लंबी लाइन में खड़े होना है या दैनिक काम पर जाना है।
गरीब आदमी बैंक में लाइन में लगने से न तो काम पर जा सका और न ही थोड़े बहुत जो पैसे थे बैंक में जमा कर सका! कुछ दिनों बाद बैंक अपना नोटिस करता है कि बैंक ने करोड़ों रूपए जमा करवा दिए हैं। पर ये रूपए कहां गए, अब पता चल रहा है कई व्यवसायी एक बड़ी रकम विदेशों में जमा कर देश से भाग चुके हैं।
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आइए, जानें क्या है वर्तमान में दुनिया की वास्तविक सच्चाई, विशेष रूप से भारत में! गांधी सरकार हो या मोदी सरकार – दोनों के लक्ष्य समान – जनता को बेवकूफ बनाना और जनता का पैसा विदेशी बैंकों में डालने में मदद करना
समूचे भारतवर्ष के जन-मानुष की बात हो या एशिया महाद्वीप से लेकर, यूरोप, आस्ट्रेलिया या अफ़्रीका के विभिन्न देशों के भिन्न-भिन्न शहरों के नागरिकों के दैनिक जीवन से संबंधित क्रियाकलापों की! अंत में निचोड़ निकलता है कि सभी को चाहिए सिर्फ असीमित पैसा और परिश्रम कम से कम!
एक सामान्य घर-परिवार की स्त्री, पुरूष की दिनचर्या की बात करें या विशिष्ट राजघराने और देश के उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों की। सभी का मकसद एक ही जान पड़ता है, वो है सिर्फ पैसा।
एक सामान्य दर्जे का किसान हो या अपार भूमि-स्वामी हों, जिनके पास किसी चीज की कमी नहीं है, वे भी महत्व दे रहे हैं तो सिर्फ पैसे को। ऐसा जान पड़ता है कि आज के आधुनिक युग में इंसान को पैसा चाहिए, भले ही उसे सुख-चैन मिले या न मिले। पैसे को सुख-चैन का माध्यम मानने वाले लोग अज्ञानता का शिकार हो रहे हैं, जिसका प्रत्यक्ष परिणाम दिखता है – बाहर से भले-चंगे दिखने वाले लोगों की अस्पतालों में मरीज के रूप में बहुलता। मन में शांति न हो, तो सुख आभास नहीं हो सकता, जिससे पनपती हैं कई किस्म की बीमारियां!
कैसे रातों-रात छा गई और जुबां पर आ गई बात प्रिया प्रकाश वारियार की, जिसने एक फ़िल्म में आंख मारकर और नैन मटका कर दिल जीत लिया युवक-युवतियों का ही नहीं देश-विदेश के सेलिब्रिटीज़ का!
तथाकथित फिल्म में महज कुछ ही सेकंड का वीडियो हो गया वायरल और इस अदाकार को होना पड़ा बंद एक कमरे में। इसलिए, पाठकों से अनुरोध है कि ऐसा कोई कार्य न करें, जिससे खुद को परेशानी होनी पड़े। एक कैदी की तरह बंद होने से अच्छा है कि सामान्य जीवन जीएं, अपनी इच्छा व पसंद के अनुसार अपनी गतिविधियों को अंजाम दें। जमाना खराब है या जमाने के लोग खराब हैं। यहां एक संकेत की जरूरत है, जहां एक जा रहा है, तो सभी उसी राह में दौड़ने को आमदा हैं।
आज जीवन में कुछ लोग अपना नाम और पैसा दोनों कमाना चाहते हैं और कुछ सामान्य मानसिकता के लोग हैं, सिर्फ वे ही अपने जीवन का आनंद ले रहे हैं। क्या लेकर आए थे और क्या लेकर जाओगे! स्वस्थ शरीर और खुशी ही एकमात्र पहलू हैं, जिनके सहारे इंसान अपने जीवन के मौज ले सकता है। जिस पर बंदिश लगना शुरू हो जाती है, तो उसी को अनुभव होता है कि क्या और कैसे उसके दिन चल रहे हैं। स्वतंत्रता नहीं रही, तो वह पैसा और नाम किस काम का। आप भी प्रधानमंत्री बन जाएं, राष्ट्रपति बन जाएं, कोई राजकुमार या राजकुमारी हों, या कोई बड़ी सेलिब्रिटी बन जाएं, आपका जीवन कष्टकारी व प्रतिबंधों से घिर जाएगा। तो इससे अच्छा क्यों न एक सामान्य जीवन जीने की इच्छा रखें और अपने परिवार के साथ-साथ पड़ोस में भी स्वच्छ व सुखी जीवन बनाने में लोगों को सहयोग करें।
आपका स्वास्थ्य स्वस्थ है तो आप अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार अपनी लाइफस्टाइल में देशकाल परिस्थिति के आधार पर परिवर्तन कर सकते हैं। आपको जो जानकारी किताबों, मीडिया व मूवीज़ से मिलती है, उसे करीब से देखने, गहराई से समझने और मौजूद चीजों को स्पर्श करने के लिए उस जगह पर जा सकते हैं और स्थानीय लोगों से विस्तृत जानकारी ले सकते हैं। देश हो विदेश, देखने लायक स्थलों, नए स्थानों की यात्रा पर जाना एक अदभुत अनुभव है। स्वास्थ्य स्वस्थ होने से आप एक नहीं अपितु अनके स्थानों की यात्रा अपने विचार, इच्छा व आर्थिक स्थिति के आधार पर कर सकते हैं।
नए स्थानों पर जाने से आपको नई चीजें देखने को मिलती हैं, वहां के रहन-सहन व खानपान की जानकारी मिलती है और आपको पसंद आने पर आप उसे अपने घर-परिवार में आजमाते हैं, जिससे आपकी लाइफस्टाइल में परिवर्तन आता है।
क़्या आपको रूचि है प्रीवेडिंग के अलावा पोस्टवेडिंग फ़ोटो शूट करवाने में और अपने मित्रों व परिवार के साथ सोशल प्लेटफ़ॉर्म जैसे, फेसबुक और इंस्टाग्राम में शेयर करने में..... एकदम सही विचार हैं आपके यदि आप समय-समय पर अपने फ़ोटो व वीडियो शेयर करती हैं या करना चाहती हैं। यह एक बहुत बड़ी खुशी का विषय है कि आप अपने साथ-साथ अन्य लोगों को भी खुश होने का मौका देती हैं। एक बात हमेशा याद रखें कि जिन्दिगी दोबारा नहीं आएगी, और आपको पूरा है यह कहने का कि ये मेरी लाइफ है और यही मेरा स्टाइल है!
आप अपडेट रहते हैं तो आपके बच्चों को भी अपने हुनर को गति देने के अवसर मिलते हैं।
आपके जीवन में मेकअप का महत्व
हम जानते हैं कि मेकअप कितना भी कर लें, यह अस्थायी है, मतलब थोड़ी देर बाद आप जैसे हैं वैसे ही दिखने लगते हैं, फिर भी लोग क्यों व्यूटी पार्लर जाकर किस्म-किस्म प्रकार का मेकअप करते हैं या पैसे खर्च कर अपना चेहरा खराब करते हैं। वास्तविकता यह है कि हम चेहरा खराब करने के साथ-साथ अपनी आंखें, लिप्स को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। बहुत आसान है अपने चेहरे को सुंदर व जवां बनाने के लिए, यदि हम नेचुरल हर्बल्स का सेवन करना शुरू कर दें। लेकिन आज इंसान इतना व्यस्त हो गया है कि कुछ प्रतीक्षा करना ही नहीं चाहता है, बस रेडीमेड आइटम्स चाहिए, चेहरे पर पोतो और चल दो काम पर।
सावधान, यह बहुत ही नुकसान है आपके चेहरे और शरीर दोनों के लिए।
हैलो सर / मैडम! सोचो, यदि आप आंवला, हल्दी, तुलसी व नींबू जैसे चीजें उपयोग में लाएं, तो इसका तात्पर्य है कि आपको भी विज्ञान की जानकारी है, तभी तो आप सुंदरता व स्वस्थ शरीर के कारण औरों से अलग दिखते हो। आपके चेहरे में मुस्कान बिखेर देती हैं प्राकृतिक चीजें और आप थोड़ा अपने शरीर को कष्ट देकर प्रातःकाल उठें और चले जाएं कुछ दूर सैर पर तो फिर क्या..कुछ दिन बाद आप भी कहने लगते हैं, कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। जो लोग आपको देखते हैं, उन्हें लगता है कि आप हंस रही हैं, जो आपके सुबह उठने व नेचुरल हर्बल्स का सेवन करने से उन्हें ऐसा लगता है। तो देर किस बात की है, आज ही से शुरू करें, आंवले का सेवन, तुलसी का सेवन।
गौर करें अधिक मेकअप बन सकता है आपके लिए बड़ी समस्या
आपकी शादी होने वाली है, परंतु आप चाहती हैं कि आप मॉडर्न दिखने के लिए तरह-तरह का मेकअप व हेयर-स्टाइल चेंज करती हैं, जिससे आपके लुक में कुछ समय के लिए थोड़ा अंतर दिखता है और जल्दी ही आप अपने वास्तविक रंग-रूप से भी खराब दिखने लगते हैं और आपके पार्टनर को आप में जो दिखता है, वह उसे दिखता नहीं है, तो रिश्तों में आने लगती है कड़वाहट! कभी-कभी यह तलाक का कारण भी बन सकता है। इसलिए सावधानी बरतें।
लेकिन यह बात 100% सत्य है कि आप नेचुरल हर्बल्स उत्पाद उपयोग करते हैं, तो आपको कभी भी इस तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
शरीर स्वस्थ नहीं है, तो चेहरे पर हंसी अच्छी नहीं देखता है या चेहरा अच्छा नहीं दिखता है, नोटिस करें इसका मतलब त्वचा के रंग से नहीं है, जिसका शरीर स्वस्थ होता है उसमें आत्मविश्वास होने और शरीर में पर्याप्त उर्जा व शक्ति होने की वजह से चेहरा ही नहीं पूरा शरीर एक मॉडल दिखता है। गौर करना जब आप अपनी तुलना किसी भी एक स्वस्थ व्यक्ति से करते हैं।
क्या अंतर्राष्ट्रीय स्तर की मीटिंग्स में भागेदारी कर, जैसे मोदी जी व अमेरिकी राष्ट्पति बराक ओबामा या फिर डोनाल्ड ट्रम्प के बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर वार्ता करने से उनके सामाजिक स्वास्थ्य – स्थिति का प्रभाव कुछ देशों या पूरी दुनिया के लोगों पर पड़ा है? या डोनाल्ड ट्रम्प व किम जोन के बीच हाल ही में हुई अंतर्राष्ट्रीय मीटिंग से दुनिया को कुछ सीख मिली है या दुनिया के लोग अब निश्चित हैं कि संभवतः अब दुनिया में कोई विश्व युद्ध नहीं होगा। किम जोन ने जहां अमेरिका को परमाणु युद्ध की चेतावनी दी थी, इससे उसकी सामाजिक स्थिति पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव पड़ा था और दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर किसी न किसी प्रकार से उत्तर कोरिया के तानाशाह, किम जोन को बैठक में शामिल होने के लिए बाध्य कर दुनिया को दिखा दिया है, कि शांति वह सुलह के तरीके अपनाने में केवल कुछ देश ही नहीं पूरी दुनिया में अमन चैन की स्थिति बरकरार रखी जा सकती है।
आपकी हेयर स्टाइल और आपकी सामाजिक स्थिति
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